Shri Hanuman Chalisa in Hindi

Shri Hanuman Chalisa in Hindi आज की पोस्ट में हम आपको श्री हनुमान चालीसा  (Shri Hanuman Chalisa) को बताएँगे लेकिन इससे पहले की हम आपको श्री हनुमान चालीसा के बारे में बताये पहले हमें ये जान लेना चाहिए की श्री हनुमान चालीसा को पढ़ने का सही समय क्या है और कैसे पूजा करनी चाहिए (घर के उत्तर - पूर्व में पूजा का स्थान हो तो सबसे अच्छा होता है )

दोस्तों श्री हनुमान चालीसा को पढने का और पूजा करने का सही समय प्रातः काल का समय होता है प्रातः काल आप अपने दैनिक कार्यो को पूरा कर के स्नान करे और फिर लाल कपडे को धारण कर के श्री हनुमान जी की मूर्ति या फोटो के सामने आसन पर बैठे उसके बाद पवित्रीकरण करे , पवित्री करण करने के लिए अपने बाये हाँथ में जल ले और दाये हाँथ से उसको ढके और फिर पवित्री करण का मन्त्र पढ़कर इस जल को अपने उपर छिड़क ले 

पवित्री करण करने के बाद अब आप  मन ही मन श्री हनुमान भगवान् का ध्यान करते हुवे उनका आवाहन करे और धुप , दीप तथा अगरबत्ती को जलाये और उनको थोडा सा मीठा भोग लगाये उसके बाद निचे दिए हुए श्लोक को पढ़े और फुल (पुष्प) समर्पित करे |

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, दनुजवनकुशानुं  ज्ञानिनामग्रगण्यम्

सकल गुणनिधानं बानराणामधीशं , रघुपति प्रियभक्तं वानजातं नमामि

मनोजवं मारुततुल्यवेगं , जितेन्दयं बुद्धिमतां वरिष्टम्

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतं शरणं प्रपघे  

ऊपर दिए हुए मन्त्र को पढ़ने के बाद पुष्प समर्पित कर दे ,अब आप निचे दी हुई श्री हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करे । (Hanuman Chalisa lyrics in Hindi)

श्री हनुमान चालीसा (Shri Hanuman Chalisa in Hindi)

॥  दोहा

श्री गुरु चरण सरोज रज , निज मन मुकुर सुधारि ।  बरनऊ रघुबर विमल जसु , जो दायक फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार ।  बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं , हरहु कलेश विकार ॥

 

॥  चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर ।  जय कपीस तिहुँ  लोक उजागर ॥

 

राम दूत अतुलित बलधामा ।  अञ्जनि पुत्र पवन सुत नामा ॥

महावीर विक्रम बजरंगी ।  कुमति निवार सुमति के संगी ॥

 

कंचन बरन विराज सुबेसा ।  कानन कुंडल कुंचित  केशा ॥

हाथ बज्र औ ध्वजा विराजै ।  काँधे मूंज जनेऊ साजै ॥

 

शंकर सुवन केसरी नंदन ।  तेज प्रताप महा जग बंदन  ॥

विद्यावान गुनी अति चातुर ।  राम काज करिबे को आतुर ॥

 

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।  राम लखन सीता मन बसिया ॥

सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा ।  विकट रुप धरि लंक जरावा ॥

 

भीम रुप धरि असुर  संहारे ।  रामचंद्र के काज संवारे ॥

लाय संजीवन लखन जियाये ।  श्री रघुवीर हरषि उर लाए  ॥

 

रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।  तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥

 सरस बदन तुम्हरो यश गावैं ।  अस कहि श्री पति कंठ लगावैं ॥

 

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा।  नारद सारद सहित अहीशा ॥

यम कुबेर दिगपाल  जहाँ ते ।  कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥

 

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।  राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥

तुमरो मंत्र विभीषण माना ।  लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥

 

जुग सहस्त्र योजन पर भानु ।  लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।  जलधि लांघि गए अचरज नाहीं ॥

 

दुर्लभ काज जगत के जेते ।  सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥

राम दुलारे तुम रखवारे ।  होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥

 

सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।  तुम रक्षक काहू को डरना ॥

आपन तेज सम्हारो आपै ।  तीनों लोक हांक तें काँपै ॥

 

भूत पिशाच निकट नहीं आवै ।  महावीर जब नाम सुनावै ॥

 नासै रोग हसै सब पीरा ।  जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥

 

संकट तें हनुमान छुड़ावै ।  मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥

सब पर राम तपस्वी राजा ।  तिन के काज सकल तुम साजा ॥

 

और मनोरथ जो कोई लावै ।  सोई अमित जीवन फल पावै 

चारों जुग प्रताप तुम्हारा ।  है प्रसिद्ध जगत उजियारा 

 

साधु सन्त के तुम रखवारे ।  असुर निकंदन राम दुलारे 

अष्ट सिद्धि नो निधि के दाता ।  अस वर दीन जानकी माता 

 

राम रसायन तुम्हरे पासा ।  सदा रहो रघुपति के दासा 

तुम्हरे भजन राम को पावै।  जन्म जन्म के दुःख बिसरावै 

 

अंतकाल रघुवर पुर जाई ।  जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई 

और देवता चित्त न धरई ।  हनुमत सेई सर्व सुख करई

 

संकट कतै मितै सब पीरा ।  जो सुमरै हनुमत बलबीरा 

जय जय जय हनुमान गोसाईं ।  कृपा करहु गुरुदेव की नाईं

 

जो शत बार पाठ कर सोई ।  छूटहि बंध महासुख होई

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा ।  होय सिद्धि साखी गौरीसा 

 

तुलसी दास सदा हरि चेरा ।  कीजै नाथ ह्रदय महँ डेरा 

 

॥  दोहा

पवन तनय संकट हरण , मंगल मूरति रूप 

राम लखन सीता सहित , ह्रदय बसहु सुर भूप 

--॥  इति श्री हनुमान चालीसा ॥ --

 

दोस्तों हो सके तो आप हनुमान चालीसा का पाठ पूरा होने के बाद अब आप " हं हनुमते रुदात्मकाय हूँ फट  " मन्त्र का 108 बार माला ले कर जाप करे । 

यहाँ पर श्री हनुमान चालीसा ( Shri Hanuman chalisa) दी हुई है और इसको लिखने में हमने पूरी सावधानी बरतने की पूरी कोशिश की है परअगर आपको यहाँ पर कोई गलती मिलती है तो कृपा कर के आप हमें निचे कमेंट कर के बताये और गलतियों सुधारने में हमारी मदत करे , आपकी बड़ी कृपा होगी ।

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