Love is Flow of Purity Meaning of Love in Hindi

Love is Flow of Purity Meaning of Love in Hindi - प्रेम है पवित्रता का दिव्य प्रवाह , दोस्तों आज हम प्रेम के बारे में जानेगी की प्यार क्या होता है और इसका सही अर्थ क्या है दोस्तों आजकल काफी लोग प्यार को गलत रुप में लेते है या इसका गलत मतलब निकलते है और कुछ लोग ऐसे भी है जो कहते है की उन्हें किसी से प्यार है पर उन्हें यही नहीं पता है की प्यार का सही अर्थ क्या है और प्यार कैसे किया जाता है चलिए दोस्तों आज हम जानते है की प्यार का सही अर्थ क्या है चलिए अब इस पोस्ट को पढ़ते है - प्रेम है पवित्रता का दिव्य प्रवाह (Love is Flow of Purity Meaning of Love in Hindi)

Love is Flow of Purity Meaning of Love in Hindi - प्रेम है पवित्रता का दिव्य प्रवाह 

प्रेम है पवित्रता का दिव्य प्रवाह ! प्रेम नदी की बहती धारा के समान है। प्रेम तो एक पावन प्रवाह है जहाँ से भी बहता है , वहाँ पावनता एवं शीतलता का स्पंदन , स्पर्श एवं सोंदर्य का रंग उडेल देता है। प्रेम बुद्धि एवं मन का विषय नहीं है ,प्रेम तो एक अनुभव है। प्रेम दिल से दिल को महसूस होता है प्रेम को शब्दों में बाँधा नहीं जा सकता ।

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प्रेम कभी एक तरफ़ा और एकांगी नहीं होता , एकांगी होती है। जिन्हें प्रेम समझ लिया जाता है, प्रेम करने का विषय नहीं है ,प्रेम किया नहीं जाता है। हो जाता है स्वतः जो अंदर से प्रकट हो वही सच्चा और आदर्श प्रेम है। प्रेम का स्वधर्म है प्रवाह्वान रहना , बहना , बस बहते रहना । जिस प्रकार नदी लगातार बहती हुई मार्ग में असंख्यो का कल्याण करती हुई, महासागर में जा मिलती है बस प्रेम की भी यही खाशियत है।

प्रेम बहुआयामी और बहुरंगी है। प्रेम के जिस स्वरूप को हमारी नज़रे देख पाती व समझ पाती है। उसे ही इति श्री मान बैठती है किन्तु प्रेम का जो सम्पूर्ण और विशिस्ट स्वरूप है, उसे न तो आँखों से देखा जा सकता है न ही कानो से सुना जा सकता है। उसे तो केवल ह्रदय से ही अनुभव किया जा सकता है। प्रेम तो मेघो की सुहानी बूंदों के समान है, जो बरसती है तो धरती की तपन को शांत कर देती हैं।

प्रेम इन्द्रियों का विषय नहीं है प्रेम ह्रदय का पवित्र सृंगार है। प्रेम उसी के ह्रदय में स्थिर रहता है, जो पवित्रता और दिव्यता से परिपूरित हो प्रेम मांग नहीं बल्कि त्याग , समर्पण एवं बलिदान है। इसी पवित्र प्रेम प्रवाह में प्रवाहित हो कर हमारे देश के वीर बलिदानियों ने अपने प्राण राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उच्च आदर्शो के प्रति सतत प्रेम भावना भारत माता के प्रति अटूट प्रेम ही हमें देश पर कुर्बान होने का साहस देता है। ऐसा अविरल पवित्र प्रेम हमारे ह्रदय में प्रवाहित हो तो ही हम सच्चे प्रेमी दिव्य प्रेमी बन सकते हैं।

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