Indian Parv Tyohar Ka Mahatva Importance of The Festivals

दोस्तों आज हम जानेगे की भारतीय पर्व और त्यौहार का क्या महत्व है ( Indian Parv Tyohar Ka Mahatva Importance of The Festivals ) . यह जानना बहुत जरुरी है कुकी हम पर्व त्यौहार तो मानते है पर हमे यह नहीं पता होता की कु मानते है इसको मानाने का उद्येश्य क्या है और हमारे ये सारे पर्व कु बनाये गए उनको बनाने का कारण क्या है , तो चलिए आज इस पोस्ट के मद्धम से हम ये जानते है की हमारे भारतीय पर्व का क्या महत्व है

पर्व - त्यौहार की महत्ता ( Indian Parv Tyohar Ka Mahatva Importance of The Festivals )

दोस्तों आज हम लोग पर्व - त्यौहार की महत्ता ( Indian Parv Tyohar Ka Mahatva Importance of The Festivals ) भारतीय पर्व और त्यौहार के बारे में जानेंगे की पर्व त्यौहार को क्यों मानया जाता और पर्व त्यौहार की परम्परा को हमारे पूर्वजो ने क्यों बनाया और इन्हे मानाने के पीछे क्या उद्देश्य है।

मनुष्य का जीवन तीन वर्गों में बँटा हुआ है :-

  1. व्यक्तिगत जीवन
  2. पारिवारिक जीवन
  3. सामाजिक जीवन

मानव समाज को सुविकसित करने तथा आदर्श निष्ट बनाये रखने के लिए ऋषियों ने हर स्तर पर प्रखर दर्शन और विवेक सम्मत परम्पराओं का क्रम बनाया है ताकि मनुष्य सहज रूप से प्रगति कर सके और सद्गति का अधिकारी बन सके।

भारतीय संस्कृति को देवसंस्कृति भी कहा जाता है :- देवता बनाने वाली संस्कृति। संस्कृति की प्रचलित परम्पराओं को अपनाकर ही मनुष्य का व्यक्तिगत जीवन देवतुल्य , पारिवारिक जीवन विकसित और सामाजिक जीवन समुन्नत होता है। व्यक्तिगत जीवन को ऊपर उठाने के लिए पूजा - उपासना , साधना - स्वाध्याय ,  मनन - चिंतन के क्रम बनाये गए है। पारिवारिक स्तर पर श्रेष्ट गुणों के विकास एवं उत्तरदायित्वों के पालन का वातावरण बनाये रखने के षोडश संस्कारों का क्रम बना जिसके प्रभाव से परिवार , व्यक्तिगत स्वार्थपरता से ऊपर उठकर समाज को अपना परिवार मान सके इन्हीं संस्कारों के प्रभाव से परिवार भाव भी रक्त संबंधों की सीमा से आगे बढ़कर " वसुधैव कुटुम्बकम " तक विकसित होता चला गया।

समाज को समुन्नत एवं सुविकसित बनाने के लिए सामूहिकता , ईमानदारी , कर्तव्यनिष्ठा , नागरिकता ,परमार्थ परायणता , देशभक्ति और लोकमंगल जैसी सत्प्रवृत्तियाँ विकसित करने के लिए पर्व त्यौहार मनाये जाते हैं।  पर्व - त्यौहार मानाने से जहाँ आपसी भाई - चारा स्नेह आत्मीयता , सहकार - सौजन्य बढ़ता है वाही समाज का स्तर भी ऊँचा उठता है। पर्वों की परम्परा हजारों - लाखों वर्षों से चली आ रही है। प्राचीन भारत की महानता इन्हीं छोटी छोटी सत्प्रवृत्तियाँ उत्पन्न करने वाली विधि व्यवस्थाओं को ही है।

पर्वों की रचना इसी दृष्टि से हुई की प्राचीनकाल की महान घटनाओं एवं महान प्रेरणाओं का प्रकाश जनमानस में भावनात्मक एवं सामूहिक वातावरण के साथ उत्पन्न किया जाए। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए कितने ही पर्व - त्यौहार प्रचलित हैं। देश - काल परिस्थिति के अनुसार अलग - अलग क्षेत्र विशेष में कई तरह के पर्व त्यौहार  का प्रचलन है।

पर्व - त्यौहार कोई भी हों उद्देश्य है सामाजिक चेतना का जागरण एवं हर्षोउल्लास भरा वातावरण विनिर्मित करना और इसी कारण पर्व - त्योहारों की महत्ता समझ में आती है। सभी को बढ़ - चढ़कर पर्व - त्योहारों में हिस्सेदारी करनी चाहिए।

भारतीय समाज में मुख्यतः जो पर्व मानते हैं वे निम्नवत हैं :-

  • चैत्र नवरात्री ( चैत्र शुक्ल 1 से 9 तक )
  • श्रीराम नवमी ( चैत्र शुक्ल नवमी )
  • गायत्री जयंती - गंगा दशहरा ( जेष्ठ शुक्ल दशमी )
  • गुरु पूर्णिमा (आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा )
  • श्रावणी - रक्षा बंधन ( श्रावण शुक्ल पूर्णिमा )
  • श्रीकृष्ण जन्माष्टमी ( भाद्रपद कृष्ण अष्टमी )
  • सर्वपितृ अमावस्या ( अश्विन शुक्ल अमावस्या )
  • शारदीय नवरात्री ( अश्विन शुक्ल 1 से 9 तक )
  • विजयादशमी - दशहरा ( अश्विन शुक्ल दशमी )
  • दीपावली ( कार्तिक की अमावश्या )
  • गोवर्धन पूजा ( कार्तिक शुक्ल प्रथमा )
  • भाईदूज ( कार्तिक शुक्ल द्वितीया )
  • गीता जयंती ( मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी )
  • वसंत पंचमी ( माघ शुक्ल पंचमी )
  • शिवरात्रि ( फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी )
  • होली ( फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा )

इसके अतिरिक्त वैशाखी , कजली तीज , नाग पंचमी , करवा चौथ , सूर्य षष्ठी ( छठ पूजा ) , गणेश उत्सव , रथयात्रा , दुर्गापूजा , अक्षय तृतीय , संकष्ट चतुर्थी आदि  तथा महापुरुषों एवं अवतारों के जन्मोत्सव और राष्टीय पर्व आदि। पर्व त्यौहार के बारे में वैसे बाते तो बहुत है पर सभी बातो पर हम बात करे तो शायद ये पोस्ट ख़तम ही ना हो इस लिए इस पोस्ट को यही ख़तम करते है, पर हमें पूरी उम्मीद है की आपको भारतीय पर्व और त्यौहार के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी तो जरुर मिल गयी होगी और आपने जरुर जाना होगा की भारतीय पर्व और त्यौहार का क्या महत्व है और हम इन्हें कु मानते है ।

तो दोस्तों आपको यह पोस्ट पर्व - त्यौहार की महत्ता ( Indian Parv Tyohar Ka Mahatva Importance of The Festivals ) कैसी लगी ,कमेंट करके बताना न भूले। अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो दोस्तों के साथ शेयर करें । आप हमसे Facebook , Twitter और YouTube या Google + पर भी जुड़ सकते है। ऐसे ही हमसे जुड़े रहे और Hindimai.com को सपोर्ट करे और दोस्तों मे शेयर करे।

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