Holi Festival of colours Holi Information and History in Hindi

होली का पर्व रंगो का पर्व है (Holi Festival of Color) . सारे भारत में हर्षोउल्लास के साथ यह पर्व मनाया जाता है। यह एक सामजिक पर्व है होली (Holi) के रंग हमारे मन को तो रंगते ही है हमारे जीवन में भी खुशियाँ भर देते है। वसन्त में बहने वाली बयार , फाल्गुन में होली का त्यौहार , मस्ती से भरा रंगो का सुरूर , जिंदगी के सारे अवसादों को मिटा देता है।सभी दिशाओं में देखने में ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति भी होली का आनंद ले रही है।

रंगो का पर्व होली (Holi Festival of colours Holi Information and History in Hindi)

फाल्गुन में ऋतुराज बसंत अपने पुरे योवन पर होता है। सबके मनो में अनायास ही खुशियों के फूल खिलते हैं। प्रकृति भी सजी-धजी लगती है , आम्र मंजरियों से वृक्ष लद जाते हैं।कोयलों की कुकों से वातावरण भर उठता है। कचनार , कृष्णचूड , अमलतास,पलास,समल ,पिली सरसों आदि दुल्हन की तरह सज - धज  कर खड़े होते हैं, प्रकृति भी होली के रंगों में रंगी नजर आती है। इसलिए पहले होली खेलने के लिए रंगो का निर्माण फूल पत्तियों से ही करके होली खेलते थे , जिससे त्वचा को कोई नुकसान भी नहीं होता था। आजकल केमिकल युक्त कलर बाजार से लाकर होली खेलते है जिन रंगो से कभी कभी त्वचा को हानि पहुचती है।

होली एक ऐसा त्यौहार है जिसमे अनेकों भाव समाये हुए हैं। इसलिए यह पुरे देश का अपना त्यौहार बन गया है। जिसमें जाती - पाति , वंस - वर्ग , ऊँच - नीच , छोटा - बड़ा , हिन्दू - मुस्लिम सबको एक सामान करके अपने में समेट लिया है। देश के अनेक भागों में विशेष रूप से होली के उत्सव प्रसिद्ध हैं ( Indian Holi )। मथुरा वृन्दावन के होली की फूलों की होली , लठमार होली बड़ी प्रसिद्ध है।

अयोध्या का होली उत्सव , लखनऊ - कानपुर में कई दिनों तक धूम - धाम से मनाया जाने वाला होली उत्सव , समूचे देश में अनेको स्थानों पर विशेष तैयारी के साथ होली मानाने के प्रसंग है।  गाँव से लेकर शहर तक , झोपड़ी से लेकर महलों तक रंगो से भरा यह होली का त्यौहार पूरे भारत देश का त्यौहार है। ये वो त्यौहार है जो युवाओ में बचपन और भजुर्गो में योवन वापस लौटा देता है।

इस पर्व को सभी वर्ण के लोग छोटे - बड़े का भेद मिटाकर बड़े उत्साह से मानते हैं। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन सायः काल के बाद भद्रा रहित लग्न  में होलिका दहन किया जाता है। इस अवसर पर लकड़ियों तथा घास - फुस आदि का बड़ा भारी ढेर लगाकर , होलिका पूजन करके उसमे आग लगाई जाती है। यह परं एक यज्ञीय पर्व है। नई फसल पकने लगती है उसके उल्लास में सामूहिक यज्ञ के रूप में होली जलाकर नवीन अन्न का यज्ञ करके अर्थात पहले यज्ञ भगवान को खिलाकर उसके बाद स्वयं के उपयोग में लाने का क्रम बनाया गया है।

होली पर्व का इतिहास (Holi History)

एक पौराणिक कथा के साथ इस पर्व का विशेष तात्पर्य है। आदर्श सत्याग्रही , हरी भक्त प्रह्लाद को मारने के अनेकों उपाय प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप ने किये किन्तु उसे मार न सका।  हिरण्यकश्यप की बहन थी होलिका , जिसे अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। हिरण्यकश्यपु ने लकडिया इकटठी करवा कर उसमे आग लगवा दी और प्रह्लाद को गोदी में लेकर होलिका को अग्नि में प्रवेश करने का आदेश दिया। प्रह्लाद को गोदी में लेकर होलिका ने अग्नि में प्रवेश किया किन्तु ईश्वर की ऐसी कृपा हुई की अग्नि देव ने होलिका को जलाकर राख कर दिया और प्रह्लाद बच गए। क्रोध में उन्मत हिरण्यकश्यपु प्रह्लाद को खम्बे से बांधकर नगी तलवार लेकर स्वयं मारने दौड़ पड़ा तो नरसिंह भगवान ने प्रकट होकर आततायी हिरण्यकश्यपु का अंत कर दिया।  तभी से प्रह्लाद की स्मृति में तथा आसुरी प्रवित्ति के नास हेतु इस पर्व को मानाने की महान परम्परा प्रचलित है।

यह राष्टीय चेतना के जागरण का पर्व है। जहाँ वर्ण भेद है वहाँ समस्त साधन सम्पदा रहते हुवे भी कलह - कलेश और आशक्तता रहेगी। इसके विपरीत जिनमें भातृत्व है , मेल - जोल है , आपसी - सहकार वृत्ति है वे अल्प साधनों में भी प्रसन्न और शक्तिशाली रहेंगे। इसीलिए होली को समता का पर्व भी मानते हैं।  जिस प्रकार श्रावणी पर्व ब्राह्मणो का , दशहरा क्षत्रियो का , दीपावली वैश्यों का मुख्य पर्व मानते है , उसी प्रकार होली को शूद्र वर्ग का प्रधान पर्व माना जाता है। भारतीय संस्कृति , समता - सिद्धांत की संस्कृति है जिसे सभी वर्ण के लोग हिल - मिलकर चरितार्थ करते हैं।

होली के दिन घरों से अश्लील चित्र , अश्लील साहित्य , कूड़ा - करकट आदि को होलिका में दहन कर दे। समाज में जो कुरीतियाँ पनप गयी है , भेद भाव , राग - द्वेष , कटुता आदि को भी मन से निकाल कर होलिका के साथ जला दे। इसके स्थान पर सामूहिकता , सहकारिता , भाई चारा , उत्साह , सौजन्य , करुणा , प्रेम आदि विशेषताओं , प्रेरणाओं को उभारने- बढ़ाने के लिए होली के पर्व का सामूहिक आयोजन अतीव उपयोगी है।

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