Holi Festival of colors Puja Vidhi Holika Dahan Pujan Vidhi in Hindi

दोस्तों हमने पिछली पोस्ट में होली के बारे में जाना - रंगो का पर्व होली (Holi Festival of colours Holi Information and History in Hindi)  आज इस पोस्ट में हम जानेंगे की होली की पूजा कैसे की जाती है (Holi Puja )या होली की पूजन विधि (Holi Pujan Vidhi) क्या है।तो आइये जाने की होली पूजन विधि क्या हैऔर होली कैसे मनाये। (Holi Festival of colors Puja Vidhi Holika Dahan Pujan Vidhi in Hindi )

होली पूजा विधि (Holi Puja Vidhi - Holika Dahan Pujan Vidhi)

होली पूजन के लिए स्थानीय साधनो एवं परिस्थितियों के अनुसार रूप रेखा बना लेनी चाहिए। जहाँ होलिका दहन होना है वहाँ समस्त पूजन सामग्री एकत्र कर लें। एक लोटा जल , नारियल, अक्षत, फूल , रोली , गुलाल , गुड आदिसमता देवी पूजन के लिए चावल की तीन ढेरियाँ , मृतिका पूजन के लिए मृतिका पिंड ( मिटटी का छोटा ढेला ) , नर्सिह भगवान के पूजन के लिए नर्सिह भड़वान का चित्र , नवान्न यज्ञ के लिए गेहू की बाल, चने की बूट आदि पहले से तैयार रखे।

सर्व प्रथम पवित्री करण आदि षट्कर्म का सामान्य क्रम पूरा करने के बाद हाथ में अछत फूल ले कर नरसिंह भगवान का आवाहन निम्न मन्त्र बोलते हुवे करे - ॐ नर्शिंहाय विदमहे , वज्रनखाय धीमहि। तन्नो नरसिंह : प्रचोदयात। ॐ श्री नरसिंह भगवते नमः।  आवाहयामि , स्थापयामि , ध्यायामि।  आवाहन के साथ भावना करेंगे की दुष्ट जानो के अन्याय , अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएंगे।  दुर्बल साधनहीन आदर्श वादियों का समर्थन करेंगे। अनाचारियों के काल भगवान नरसिंह की चेतना यहाँ अवतरित हो जिससे शुखद परिस्थितियाँ बने। आवाहन के बाद षोडशोपचार विधि से पूजन करें।

तत्पश्चात त्रिधा समता देवी पूजन करें। छोटी - छोटी चावल की तीन ढेरियाँ बनाकर उसका पूजन करते हैं। पूजन का भाव है की भेद - भाव मिटाकर समता को अपनाना मानव - समाज के उत्थान, विकास और कल्याण के लिए आवश्यक होता है। समाज की शक्ति समता में , एकता में और संगठन में निहित है। जाति भेद और अर्थ भेद अर्थात असमानताओं को दूर करने के रूप में चावल की तीनों ढेरियों का पूजन किया जाता है।  भावना करे की पूजन के साथ विषमता को निरस्त करने वाले समस्त भाव का संचार हो रहा है।  निम्न मन्त्र द्वारा पूजन करें : ॐ अम्बेs अम्बिकेs म्बालिके, न मा नयति कश्चन। ससस्त्यश्वकः सुभद्रिकां, काम्पील वासिनीम्। ।

इसके बाद क्षमा वाणी का क्रम है। स्मरण रहे होली समता का पर्व है। इस अवसर पर छोटे - बड़े , ऊँच - नीच , गरीब - धनवान को भेद भुलाकर सबसे अपने अपराधों की , दुष्कर्मो की क्षमा माँगना , भविष्य में ऐसा न करने का व्रत लेना तथा अपनी भूलो पर पश्चाताप करना समता के भावों बढ़ाने के लिए उपयोगी सिद्ध होता है। अञ्जलि में जल ले साथ ही साथ मन में जो दुर्भाव , द्वेष है उन्हें आज हम त्याग रहे है इस भावना के साथ  अंजलि का जल भूमि पर छोड़ दें।
क्षमा वाणी के बाद रज धारण करें।  मातृभूमि का रज (धूल) को मस्तक पर धारण करके उसके प्रति अपना सम्मान प्रकट करें।
होलिका दहन पर नवान्न यज्ञ करें।  भारतीय आदर्शों के अनुसार प्रत्येक शुभ पदार्थ या नई वस्तु भगवान को समर्पित करके , बची हुई यज्ञावशिष्ट रूप में ग्रहण की जाती है।  गेहूँ की बाल , वहाने के बूट आदि को होलिका अग्नि में भुने। तत्पश्यात प्रसाद वितरण करें। जयघोष करे।  शुभ संकल्पो के साथ होली पूजन क्रम सम्पन्न करें और शांति पाठ करे।

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