Diwali Festival Means Diwali Puja Information History Diwali in Hindi

दोस्तों आज हम दिवाली पर्व के बारे में जानेगे Diwali Festival Means Diwali Puja Information History Diwali in Hindi . दीवाली हम सभी धूम धाम से मानते है पर कई बार इस धूम धाम में हम दिवाली के असली भाव और महत्व को भूल जाते है और आज की न्यू पीढ़ी दिवाली के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती तो आज हम इस पोस्ट में जानेगे की दिवाली क्या है , दिवाली का इतिहास क्या है (Diwali History) , दिवाली की पूजा कैसे करते है और दिवाली कु मानते है दिवाली से हमें क्या सिख मिलती है तो चलिए हम आज दीवाली के बारे में जानते है

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दीपावली (प्रकाश पर्व) - Diwali Festival Means Diwali Puja information History Diwali in hindi

दीपावली पर्व कार्तिक माह की अमावस्या को बड़ी धूम - धाम से पूरे देश में मनाया जाता है। लक्ष्मी जी प्रसन्न हों इसके लिए पर्व से पहले घरों की साफ़ सफाई , लिपि पुताई  करके सजाया जाता है। तोरण वंदनवार, आम्रपल्लव , पुष्पों से घरों को सुसज्जित करके पूजन की तैयारी की जाती है। कहा जाता है घरो की जितनी स्वच्छता , पवित्रता होगी उतनी ही अधिक लक्ष्मी जी का वरदान प्राप्त होगा।

दीपावली का इतिहास ( History of diwali )

कहावत है की भगवान श्रीराम ने जब अन्यायी, अधर्मी रावण का अंत कर दिया तब सभी ओर खुसी का माहौल हो गया इस पर अयोध्या में विशेष उत्साह था क्योंकि चौदह वर्षो बाद श्रीराम अयोध्या वापस आ रहे थे , इसी खुसी मे अयोध्या वासियों ने पुरे नगर को दीपमालाओं से सजाकर उन्हें प्रज्वलित कर प्रकाश महोत्सव मनाया था इन्हीं दीपकों के प्रकाश में श्रीराम और सीता जी का स्वागत किया गया था , इसीलिए हर वर्ष कार्तिक अमावस्या के दिन दीप मालाये जलाकर ख़ुशी (Diwali - festival of lights) को मानते है।

इसी दिन उज्जैन के प्रतापी सम्राट विक्रमादित्य का राजतिलक भी हुआ था इसलिए भी दीपावली पर्व उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। समाज के चारों वर्ण ब्राह्मण , क्षत्री , वैश्य और शूद्र , इन चारों वर्णों के लिए विशेष रूप से कुछ पर्व है :- जैसे श्रावणी - उपाक्रम ब्राह्मणों के लिए , दशहरा ( विजयादशमी ) क्षत्रियों के लिए , दीपावली वैश्यों के लिए और होली शूद्रों के लिए।परन्तु इसका आशय यह नहीं है की इन पर्वों को अलग अलग वर्ण के लोग ही मानते हैं, बल्कि सभी वर्णों के लोग भी पर्वों को मानते हैं जिससे समाज की एकता और अखंडता कायम रहती है।

दीपावली पूजन (Diwali Puja Vidhi - Lakshmi Puja)

साफ़ सफाई किये हुए सुसज्जित घर में पूजा वेदी बनाये, पूजा की चौकी पर भगवान गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति अथवा चित्र स्थापित करें आधा जल भरकर नारियल , आम्रपल्लव से सजाकर कलस या लोटा रखें , बही खाता , कलम - दवात आदि को भली प्रकार सजाकर रखना चाहिए।  पूजा की सामग्री :- अक्षत (चावल) - फूल; रोली , कलावा , अगरबत्ती ,माचिस , कपूर , मिष्ठान , खीर , बताशा , ऋतुफल आदि थाली में सजाकर रख लें। पाँच - ग्यारह अथवा चौबीस दीपक , बत्ती घृत अथवा तेल डालकर रख लें। हो सके तो एक बड़ा चौमुखी दीपक भी रखें।

पूजा चौकी के समक्ष आसन बिछाकर दंपत्ति बैठें , साथ में घर के सभी सदस्य भी रहे , दंपत्ति न हो तो घर में पूजा क्रम संपन्न करने योग्य जो हों वे बैठे। सर्वप्रथम षट्कर्म कर चन्दन धारण करें, कलश पूजन करे , सर्वदेव नमस्कार एवं स्वस्तिवाचन आदि का क्रम संपन्न करें। तत्पश्चात गणेश आवाहन , पूजन करें।  गणेश जी को प्रथम पूज्य विघ्न विनाशक और बुद्धि - विवेक का देवता माना गया है।  दीपावली पर गणेश पूजन से तात्पर्य है कि हम धन को खर्च करने और कमाने में बुद्धि - विवेक से काम लें।  अविवेकी ढंग से बुद्धि हीनता के साथ उसे गलत ढंग से न तो अर्जन करें न ही खर्च करें।

इसके बाद लक्ष्मी जी का आवाहन , पूजन करें , लक्ष्मी जी को विष्णु भगवान की पत्नी अर्थात जगतमाता माना गया है।  जीवन को भली प्रकार विकसित होने मे अर्थ (money) प्रधान साधनों की महती आवश्कता होती है। लेकिन स्मरण रहे हम इनका उपयोग माता की तरह ही करें। जिस तरह माता का पयपान हम जीवन धारण करने , भूख बुझाने के लिए करते हैं उसी तरह धन आदि साधनों का सदुपयोग करें।  इसी तथ्य को हृदयंगम करते हुए महालक्ष्मी जी का पूजन करें।

इसी के साथ बही खाता और कलम - दवात का भी पूजन करें।  अक्षत - पुष्प , चन्दन , धुप , दीप , नैवेद्य आदि समर्पित कर पंचोपचार अथवा षोडशोपचार विधि से पूजन करें।  फिर दीपदान करें , सभी दीपक प्रज्वलित करें , दीपक प्रकाश के प्रतिक हैं , ज्ञान और प्रकाश के वातावरण में ही लक्ष्मी बढ़ती हैं फलती फूलती हैं।  अज्ञान और अंधकार में वह नष्ट हो जाती है।  इसी लिए प्रकाश के प्रतिक दीप जलाये जाते हैं।  घर के विभिन्न स्थानों पर दरवाजे पर दीप सजा दें।
दीपदान के बाद आरती करें , क्षमा प्रार्थना करें। पुष्पांजलि चढ़ाये , नमस्कार करें , जयघोष के साथ शांतिपाठ करें।

दीपावली पर्व की शिक्षा

दीपावली पर्व लक्ष्मी जी का पर्व माना गया है। लक्ष्मी से तात्पर्य है धन अर्थात - अर्थ। दीपावली पर हम अपनी , आर्थिक स्थिति का ब्यौरा बनाते हैं। लाभ - हानि पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हैं।  हिसाब - किताब बनाते हैं। लेकिन हिसाब किताब केवल किताब तक सीमित करने का पर्व नहीं है बल्कि आर्थिक क्षेत्र की बुराइयों का त्याग कर अच्छाइयाँ ग्रहण करने का पर्व है। धन अर्थात लक्ष्मी, लक्ष्मी जीवन की साधना है जो विकास की और बढ़ने का सहारा है ठीक उसी तरह जैसे माँ का दूध। न की भोग विलास , ऐशो - आराम के लिए। इसीलिए माँ लक्ष्मी के रूप में अर्थ की पूजा करना दीपावली का एक विशेष कार्यक्रम है। आवश्यक खर्च करना , उपयोगी कार्यो में लगाना , नीति और श्रमपूर्वक धनोपार्जन करना , बजट बनाकर अपनी क्षमता के अनुसार खर्च करना , आर्थिक क्षेत्र में संतुलन बनाये रखना ये दीपावली पर्व के विशेष सन्देश हैं।

आज समाज में इस उल्लास भरे प्रकाश पर्व पर कुछ विकृतियाँ देखने को मिलती हैं।  प्रकाश फैलाने के नाम पर अनावश्यक बारूद जलाना जिससे वातावरण दूषित तो होता ही है धन ही अत्यधिक खर्च हो जाता है।  कही कहीं जुऑ खेलने के परम्परा है यह भी एक घातक बुराई है जिसे समाज से निकाल फेकना चाहिए।  दीपक जलाएं , कैंडल लगायें , वास्तव में प्रकाश का पर्व है हमारे जीवन में प्रकाश आये , अंधकार बढ़ाने वाली प्रवृत्तियाँ दूर हों ज्ञान का प्रकाश फैले इन्हीं दिव्य भावनाओं के साथ दीपावली मनायें तो पर्व मानना सार्थक होगा।

शुभ दीपावली , आपका जीवन प्रकाशमय हो !

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