Adopt Indian Culture and Become Great

आज हम भारतीय संस्कृति अपनाये और महान बने ( Adopt Indian Culture and Become Great ) के बारे में जानेगे दोस्तों इससे पहले की पोस्ट में हमने जाना था भारतीय संस्कृति की मान्यताएं एवं विशेषताएं के बारे में। आज हम कुछ इतिहास के महापुरुषो के बारे में भी बात करेंगे जिन्होंने भारतीय संस्कृति को अपनाकर अपना जीवन महान बना लिया ।

भारतीय संस्कृति अपनाये और महान बने ( Adopt Indian Culture and Become Great )

भारतीय संस्कृति के सूत्रों को जीवन में अपना कर , जीवन का अंग बनाकर महानता प्राप्त की जा सकती है। पूर्व काल में इन्ही संस्कृति सूत्रों को अपनाकर श्रेष्ठ व्यक्ति बनते थे। जिससे देश का गौरव बढ़ता था, भारत में जब उसकी महान संस्कृति को व्यावहारिक रूप से अपनाया जाता था, तब यहाँ प्रत्येक परिवार नर -रत्नों की खदान था। महामानवो का मूल्य करोडों रुपयों की लागत से बनने वाले उधोग प्रतिष्ठानों से कहीं अधिक होता है। कोई देश धन सम्पत्ति के आधार पर ही विकासवान नहीं मान लिया जाता है। उसका असली बल तो राष्टीय चरित्र और महामानवों का बाहुल्य ही होता है। प्राचीन भारत में भले ही आज जितनी साधन सुविधा का , धन - सम्पदा का बाहुल्य न रहा हो पर उस समय यहाँ घर घर में जन्म लेने वाले नर रत्नों से न केवल इस देश का गौरव बढ़ा था। वरन उनके सत्प्रयत्नो से समस्त संसार ने असीम लाभ उठाया था महामानवो की भूमिका में परिपक्व हुवे मनुष्यों के व्यक्तित्व एवं कर्म इतने महान होते हैं की उनसे असंख्य मनुष्य अनुकरणीय प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

भारतीय जीवन की पारिवारिक आदर्शवादिता देखते ही बनती थी। पिता माता को संतुष्ट रखने में राम , भीष्म , श्रवण कुमार , सत्यवान जैसे बेटे भाई - भाई के प्रेम में राम - भरत , पांडवो जैसे , मित्रता निर्वाह में कृष्ण - सुदामा , गान्धारी , दमयन्ती , अनुसुइया , सुकन्या जैसी स्त्रियाँ, पत्नीव्रत पालन में राम , लक्ष्मण , अर्जुन ,  शिव जी जैसे लोगो की भरमार रही है। संतानों को आदर्श बनाने में शकुन्तला , कुंती , सुभद्रा , गंगा , सीता आदि ने जो भूमिका निवाही है। उसकी सराहना किये बिना नही रहा जा सकता परोपकार के लिए शिवि , दधीचि , हरिश्चंद्र ,भागीरथ आदि के त्याग कितने प्रेरणाप्रद थे। राजकुमार बुद्ध , राजकुमार महावीर ने राजपाठ छोड़कर लोकहित के लिए किस प्रकार साधु जीवन अपनाया था। इस परम्पराओं के अनेकों उदाहरण मौजूद है धर्म प्रचारक नारद , साहित्य स्रजेता व्यास जी , स्वास्थ्य विज्ञानी चरक , सुश्रुत , ज्योतिर्विज्ञानी आर्यभट्ट , भास्कराचार्य , रसायनवेत्ता नागार्जुन जैसे असंख्य महामनीषियो ने अपने अपने क्षेत्र में लोकोंपयोगी कार्यो के आदर्श उपस्थित किये थे।

महान ऋषि मनीषियों में विश्वामित्र , वशिष्ठ , जमदग्नि , कश्यप , भारद्वाज , कपिल , कणाद , गौतम , जैमिनी , पारासर , याज्ञवल्य , कात्यायन , गामिल , शुकदेव , श्रेंगी , लोमश जैसे सहस्त्रों महामानवों ने अपनें आदर्श चरित्र और महान कार्य कुशलता से विश्व मानव की कितनी सेवा साधना की इसका स्मरण करने मात्र से उसके प्रति श्रध्दा उमड़ती है।

शंकराचार्य, नानकदेव , गुरुगोविंद सिंह , संत ज्ञानेश्वर , तुकाराम , समर्थराम दास , चेतन्य महाप्रभु , सूरदास , तुलसीदास , मीराबाई , कबीर , दयानंद विवेकानंद आदि की संत परम्परा ने युग चेतना का किस प्रकार संचार किया था। यह किसी से छिपा नहीं है ध्रुव , प्रहलाद जैसे बालक तब घर घर में पैदा होते थे। जनक जैसे राजा खेती का कार्य कर के अपना गुजारा करते थे और राज्यकोष की पाई पाई जनहित में खर्च करते थे कर्ण , अशोक , हर्षवर्धन , मान्धाता , भामाशाह जैसे उदार दानी अपनी संपदा को सत्प्रयोजनो के लिए समर्पित करते थे।

कोई क्षेत्र ऐसा नहीं बचा था जिसमें महामानवों का बहुमूल्य दृष्टिगोचर न होता हो आदर्श वादियों के नाम गिनना असंभव है। जब घर घर में नर रत्नों और महान व्यक्तियों का उत्पादन होता था तो गणना किस किसकी जाय वर्षा होती है तो सर्वत्र हरियाली उगी दिखती है। भारतीय संस्कृति की तुलना अमृत वर्षा से की जाती है वह जहाँ भी गिरेगी वहीं नयभिराम जीवन दायिनी हरीतिमा उत्पन्न करती रहेगी भारतीय संस्कृति को जीवन में अपनाकर श्रेष्ठ गुणों का संवर्धन किया जा सकता है। जिन सूत्रों मर्यादाओं और उत्क्रष्टाओ को जीवन का अंग बनाकर महापुरुष आगे बढ़े है , महान बनें हैं हम आप भी उनको जीवन में अपनाकर महान बन सकते हैं।

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